शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

NEET और दिल्ली का प्रदर्शन: शोर से समाधान तक, मोदी सरकार का भरोसेमंद रास्ता

दिल्ली में NEET के पेपर को लेकर जो प्रदर्शन हो रहा है, उसमें छात्रों का दर्द समझा जा सकता है। एक पेपर सिर्फ एक परीक्षा नहीं, लाखों सपनों का सवाल होता है। लेकिन इस दर्द के बीच यह सोचना जरूरी है कि समाधान शोर से निकलेगा या सिस्टम सुधार से - और यहीं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व की सोच सबसे अलग और मजबूत दिखती है।


पिछले कुछ सालों में मोदी सरकार ने जिस तरह शिक्षा में पारदर्शिता को मिशन बनाया है, वह पहले कभी नहीं देखा गया। याद कीजिए, NEET जैसी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं में पहले कितने सवाल उठते थे, पेपर लीक के रैकेट कैसे बेखौफ चलते थे। इस सरकार ने ही पहली बार NTA जैसे सेंट्रल सिस्टम को मजबूत किया, एंटी-पेपर लीक कानून लेकर आई, जिसमें 10 साल तक की सजा और 1 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है। यह कानून कागज पर नहीं, छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए है।


कुछ लोग इस प्रदर्शन को मोदी सरकार के खिलाफ बताना चाहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि अगर कोई सरकार है जो छात्रों के हित में कठोरतम फैसला ले सकती है, तो वो यही सरकार है। जहाँ पहले घोटालों को दबा दिया जाता था, वहीं आज CBI जांच तुरंत बैठती है, दोषियों पर कार्रवाई होती है और सुप्रीम कोर्ट तक सरकार खुद कहती है कि एक भी दोषी नहीं बचना चाहिए, भले ही दोबारा परीक्षा ही क्यों न करानी पड़े।


मोदी जी ने हमेशा कहा है - युवाओं का भविष्य राजनीति का विषय नहीं, राष्ट्रनीति का विषय है। प्रदर्शन में खड़े कुछ छात्र भले ही गुस्से में हों, पर उनका भरोसा भी अंत में इसी सिस्टम पर है जिसे मोदी सरकार ने ईमानदार बनाने की कोशिश की है। विपक्ष इस मुद्दे पर सिर्फ आग में घी डाल रहा है, उन्हें समाधान नहीं, सिर्फ सियासत चाहिए।


आज जरूरत है इस भरोसे को और मजबूत करने की। दिल्ली की सड़कों पर नारेबाजी से नहीं, बल्कि उस नेतृत्व पर विश्वास से बात बनेगी जिसने 10 साल में भारत को दुनिया में शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों का देश बनाया है। NEET का मुद्दा भी उसी पारदर्शी और कठोर इरादे से सुलझेगा, यही मोदी की गारंटी है।

हम अंधभक्त नहीं, देशभक्त हैं

तुम अपना पक्ष रखो तो तुम देश के युवा, और हम अपना पक्ष रखें तो हम अंधभक्त?


ये दोहरा मापदंड अब नहीं चलेगा।


आज जब हम मोदी जी के समर्थन में बोलते हैं तो हमें ट्रोल किया जाता है, हमें अंधभक्त कहा जाता है। पर सवाल ये है कि क्या देश के विकास का समर्थन करना अंधभक्ति है?


हम मोदी जी का समर्थन इसलिए नहीं करते कि वो किसी पार्टी से हैं, हम समर्थन इसलिए करते हैं क्योंकि उन्होंने वो करके दिखाया जो 70 साल में नहीं हुआ।


हम समर्थन क्यों करते हैं:


1. सोच ईमानदार, काम दमदार: एक ऐसा प्रधानमंत्री जो सुबह 4 बजे उठकर देश के लिए सोचता है, जिसका अपना कोई परिवार नहीं, जिसका परिवार ही 140 करोड़ देशवासी हैं। न बैंक बैलेंस, न बंगला, न विरासत का मोह।


2. भारत को विश्व गुरु बनाना: आज भारत बोलता है तो दुनिया सुनती है। G20, योग दिवस, चंद्रयान, वैक्सीन मैत्री - ये नया भारत है जो किसी के सामने झुकता नहीं, आंख में आंख डालकर बात करता है।


3. गरीब के लिए समर्पण: शौचालय, उज्ज्वला गैस, जनधन खाता, आयुष्मान भारत, पक्का मकान, नल से जल - ये योजनाएं कागजों में नहीं, जमीन पर उतरी हैं। जिस गरीब ने कभी बैंक का दरवाजा नहीं देखा था, आज वो भी डिजिटल इंडिया का हिस्सा है।


4. संस्कृति का सम्मान: धारा 370 हटाना, राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक - जो हमारी संस्कृति को गाली देते थे, आज उन्हें भी समझ आ गया है कि भारत अपनी जड़ों से ही आगे बढ़ेगा।


तुम्हें हक है सरकार को गाली देने का, हमें भी हक है सच्चाई के साथ खड़े होने का। तुम विरोध करो, तुम्हें क्रांतिकारी कहा जाएगा, हम समर्थन करें तो अंधभक्त?


नहीं, हम अंधभक्त नहीं हैं। हम वो आंख वाले भक्त हैं जो देख रहे हैं कि देश बदल रहा है।


हम मोदी जी के साथ थे, हैं, और रहेंगे। क्योंकि ये व्यक्ति नहीं, विचार है - भारत को परम वैभव तक ले जाने का विचार।


गर्व से कहो - हम मोदी समर्थक हैं!