दिल्ली में NEET के पेपर को लेकर जो प्रदर्शन हो रहा है, उसमें छात्रों का दर्द समझा जा सकता है। एक पेपर सिर्फ एक परीक्षा नहीं, लाखों सपनों का सवाल होता है। लेकिन इस दर्द के बीच यह सोचना जरूरी है कि समाधान शोर से निकलेगा या सिस्टम सुधार से - और यहीं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व की सोच सबसे अलग और मजबूत दिखती है।
पिछले कुछ सालों में मोदी सरकार ने जिस तरह शिक्षा में पारदर्शिता को मिशन बनाया है, वह पहले कभी नहीं देखा गया। याद कीजिए, NEET जैसी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं में पहले कितने सवाल उठते थे, पेपर लीक के रैकेट कैसे बेखौफ चलते थे। इस सरकार ने ही पहली बार NTA जैसे सेंट्रल सिस्टम को मजबूत किया, एंटी-पेपर लीक कानून लेकर आई, जिसमें 10 साल तक की सजा और 1 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है। यह कानून कागज पर नहीं, छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए है।
कुछ लोग इस प्रदर्शन को मोदी सरकार के खिलाफ बताना चाहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि अगर कोई सरकार है जो छात्रों के हित में कठोरतम फैसला ले सकती है, तो वो यही सरकार है। जहाँ पहले घोटालों को दबा दिया जाता था, वहीं आज CBI जांच तुरंत बैठती है, दोषियों पर कार्रवाई होती है और सुप्रीम कोर्ट तक सरकार खुद कहती है कि एक भी दोषी नहीं बचना चाहिए, भले ही दोबारा परीक्षा ही क्यों न करानी पड़े।
मोदी जी ने हमेशा कहा है - युवाओं का भविष्य राजनीति का विषय नहीं, राष्ट्रनीति का विषय है। प्रदर्शन में खड़े कुछ छात्र भले ही गुस्से में हों, पर उनका भरोसा भी अंत में इसी सिस्टम पर है जिसे मोदी सरकार ने ईमानदार बनाने की कोशिश की है। विपक्ष इस मुद्दे पर सिर्फ आग में घी डाल रहा है, उन्हें समाधान नहीं, सिर्फ सियासत चाहिए।
आज जरूरत है इस भरोसे को और मजबूत करने की। दिल्ली की सड़कों पर नारेबाजी से नहीं, बल्कि उस नेतृत्व पर विश्वास से बात बनेगी जिसने 10 साल में भारत को दुनिया में शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों का देश बनाया है। NEET का मुद्दा भी उसी पारदर्शी और कठोर इरादे से सुलझेगा, यही मोदी की गारंटी है।